प्रिडेटरी प्राइसिंग पर TDSAT के ऑर्डर से एयरटेल और वोडा आइडिया को फायदा

नई दिल्ली 
टेलिकॉम ट्राइब्यूनल ने सेक्टर रेगुलेटर के उस ऑर्डर को खारिज कर दिया है, जिसके जरिए प्रिडेटरी प्राइसिंग के बारे में बताने वाले सिग्निफिकेंट मार्केट पावर (SMP) की परिभाषा बदल दी गई थी। इससे रिलायंस जियो इंफोकॉम की बाजार में एंट्री से पहले कारोबार कर रही पुरानी टेलिकॉम कंपनियों को बड़ी राहत मिली है, जो यह कह रही थीं कि नए रूल्स से सिर्फ जियो को फायदा हुआ है। पुरानी टेलिकॉम कंपनियों को राहत देने वाले TDSAT ने अपने ऑर्डर में ट्राई के प्रिडेटरी प्राइसिंग रेगुलेशन के उस रूल को भी खारिज कर दिया है, जिसके हिसाब से टेलिकॉम कंपनियों को बाजार में पारदर्शिता और गैर-भेदभावकारी माहौल बनाए रखने के लिए सभी टैरिफ के बारे में बताना जरूरी है। 

गुरुवार को जारी ऑर्डर में टीडीसैट ने कहा कि जियो जैसी नई कंपनी को मार्केट सब्सक्राइबर या रेवेन्यू में 30% शेयर तक हासिल करने के लिए मूल्य निर्धारण में सहूलियत देने वाले रेगुलेटरी ऑर्डर को देखकर लगता है कि टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने मूल्य निर्धारण से जुड़ी शर्तों और उनके कार्यान्वयन के संदर्भ में अपनी पावर का अनावश्यक रूप से त्याग किया था। ट्राइब्यूनल ने कहा, 'बाजार में उतरने वाली नई कंपनी को नॉन-प्रिडेटरी हालात से बचाने की आवश्यकता होने तो यह काम वेलकम ऑफर और प्रमोशनल ऑफर जैसे प्रोविजंस के जरिए किया जा सकता है, जो रिलायंस जियो ने किया, लेकिन उसे टोटल मार्केट एक्टिविटी के 30% हासिल करने देने तक नॉन प्रिडेशन से मुक्त रखना पहली नजर में ट्राई की तरफ से उठाया बहुत बड़ा कदम लगता है।' 

TDSAT के ऑर्डर से भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को बड़ा फायदा हो सकता है। ये सब्सक्राबर्स को साथ रखने के लिए कस्टमाइज्ड डिस्काउंट ऑफर करती रह सकती हैं। इन्हें रेगुलेटर इसकी रिपोर्ट देने या सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं होगी। जियो भी प्रिडेटरी प्राइसिंग से जुड़े नॉर्म्स के दायरे में आ जाएगी और बेरोकटोक 30% सब्सक्राइबर्स या मार्केट रेवेन्यू हासिल करने की आजादी खत्म हो जाएगी।  टीडीसैट ने गुरुवार को जारी ऑर्डर में कहा, 'सामान्य कारोबारी परिचालन में मौजूदा ग्राहकों को भेदभाव बिना सेगमेंट के हिसाब से दिए जाने वाले ऑफर और डिस्काउंट टैरिफ प्लान के दायरे में नहीं आएंगे और उसके बारे में रेगुलर टैरिफ प्लान के लिए तय तरीकों के हिसाब से बताने की जरूरत नहीं होगी।' 

ट्राइब्यूनल ने यह भी कहा कि किसी टेलिकॉम कंपनी को परिभाषित SMP की स्थिति तक पहुंचने से पहले उसे कृत्रिम तरीके से सुरक्षा मुहैया कराने के लिए SMP की ऐसी परिभाषा अपनाना गलत होगा जिसमें सेक्टर को प्रिडेटरी प्राइसिंग के जरिए अस्थिर करने की क्षमता हो या जिसका ऐसा उद्देश्य हो।  TDSAT ने सेक्टर रेगुलेटर से प्रिडेटरी प्राइसिंग रेगुलेशन के प्रोविजंस की समीक्षा छह महीने के भीतर करने के लिए कहा है। हालांकि उसने उन मामलों में टेलिकॉम कंपनियों के उन इंडिविजुअल टैरिफ प्लांस की जांच की व्यवस्था बहाल रखी है जो उन्हें भेदभावपूर्ण लगती हों। 

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