तेज रफ्तार रिटेल लोन में भी बढ़ रहा है बैंकों के लिए जोखिम

नई दिल्ली। बैंकों के उद्योगों को दिए गए सैकड़ों और हजारों करोड़ रुपये के बड़े कर्ज फंसने पर खूब चर्चा हो रही है, लेकिन वास्तविकता है कि छोटे खर्च भी बैंकों के लिए जोखिम भरे साबित हो रहे हैं। रिटेल सेगमेंट में तेज वृद्धि दर होने के कारण बैंक होम और ऑटो लोन देने में काफी आक्रामक मार्केटिंग कर रहे हैं, लेकिन इन कर्जो में एनपीए भी बढ़ रहा है।

और तो और प्रॉपर्टी पर दिए जा रहे कर्ज और क्रेडिट कार्ड में भी समस्या बढ़ रही है। ऐसे में बैंकों को इस सेगमेंट का फायदा उठाने के लिए ज्यादा से ज्यादा कर्ज देने के साथ सावधानी भी बरतनी होगी। आम लोगों की क्रेडिट स्कोरिंग करने वाली सिबिल ट्रांसयूनियन के ताजा आंकड़ों से रिटेल लोन में एनपीए की तस्वीर दिखाई देती है।

बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक समूचे रिटेल सेगमेंट में सितंबर तिमाही के अंत में बकाया कर्ज पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 21 फीसद बढ़ गए। रिटेल सेगमेंट के प्रमुख कर्जो में 30 से 49 फीसद तक वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन इसके साथ ही कर्ज अटकने का अनुपात भी बढ़ रहा है।

 

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