आरबीआइ व सरकार के विवाद में फंसा उद्योग जगत, कर्ज दिलाने की मांग

नई दिल्ली । आरबीआइ और वित्त मंत्रालय के बीच विवाद में उद्योग जगत की परेशानी और बढ़ रही है। उद्योग का मानना है कि दोनों को आपसी विवाद भूलकर अर्थव्यवस्था के समक्ष फंड की किल्लत दूर करने के उपायों पर ध्यान देना चाहिए। देश के दो शीर्ष उद्योग चैंबर फिक्की और सीआइआइ ने अलग अलग बयान जारी कर कहा है कि सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच बढ़ते तनाव से उनके हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

गुरुवार को सीआइआइ के तत्वाधान में विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की एक बैठक हुई जिसमें नकदी के गंभीर होते संकट पर चिंता जताई गई और आरबीआइ से तत्काल उचित कदम उठाने को कहा गया है। उद्योग जगत की राय है कि अभी फोकस ज्यादा कर्ज वितरण पर होना चाहिए। बैठक में 260 उद्योग संघों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इन समूहों में बिजली का सामान, पंखे, पंप्स व अन्य घरेलू उपकरण बनाने समेत एसएमई सेक्टर की कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे। इनके मुताबिक ज्यादातर छोटे व मझोले उद्योग 80 फीसद क्षमता पर काम कर रहे हैं और इन्हें विस्तार के लिए तत्काल फंड की जरूरत है। लेकिन बैंकों की तरफ से इन्हें पर्याप्त लोन नहीं मिल पा रहा है। जबकि दूसरे स्नोतों से मिलने वाले कर्ज पर ब्याज की दर काफी अधिक है। नए नियमों की वजह से गैर बैंकिंग कंपनियों (एनबीएफसी) से भी पहले की तरफ कर्ज नहीं मिल रहा है।

दूसरी तरफ फिक्की अध्यक्ष राशेष शाह का कहना है कि बैंक कर्ज की स्थिति सुधारने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक की तरफ से कोशिश तो की गई है लेकिन अभी और कदम उठाने की जरूरत है। मौजूदा आर्थिक रिकवरी और आठ फीसद की विकास दर पाने के लिए और अधिक फंड की आवश्यकता है। खासतौर पर एनबीएफसी के समक्ष उत्पन्न फंड की दिक्कत दूर करने के लिए फिक्की ने 21 सूत्रीय सुझाव दिए हैं जिन्हें तत्काल लागू करने की जरूरत है। फिक्की ने भी कहा है कि छोटे व मझोले उद्योगों से जुड़े उसके सदस्य फंड की दिक्कत की शिकायत कर रहे हैं। त्योहारी सीजन में फंड की समस्या तमाम तरह के उद्योगों पर असर डाल रही हैं।

सीआइआइ अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल का कहना है कि वित्तीय क्षेत्र के समक्ष कई तरह की दिक्कतों को देखते हुए तत्काल और दीर्घकालिक उपायों पर सहमति बनाने की जरूरत है। सीआइआइ ने एक तरह से चेतावनी देते हुए कहा है कि जिस तरह के वित्तीय क्षेत्र के सभी अंग एक दूसरे से जुड़े हैं उसमें एक क्षेत्र की समस्या तत्काल दूसरे को भी प्रभावित करती है। इसलिए सभी संबंधित पक्षों को एक दूसरे के साथ संवाद स्थापित कर समस्या का समाधान निकालना चाहिए। सरकार और आरबीआइ के बीच मौजूदा विवाद के पीछे कर्ज की दिक्कत भी है। आरबीआइ ने 11 सरकारी बैंकों पर खुलकर कर्ज देने समेत कई तरह की पाबंदिया लगाई हुई हैं। सरकार इन्हें हटाने की मांग कर रही है।