निजी क्षेत्र की कंपनियां भी कर सकेंगी सरकारी गैस ग्रिड का उपयोग

नई दिल्ली । देश में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सरकार इसके उपयोग का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके तहत गैस के परिवहन को सुगम बनाने की दृष्टि से राष्ट्रीय गैस ग्रिड को निजी क्षेत्र के लिए खोलने पर विचार किया जा रहा है। इस आशय का एक प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।

गैस ग्रिड को निजी क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए खोलने का अर्थ होगा कि निजी कंपनियां भी अपनी आवश्यकता के मुताबिक गैस को पोर्ट से अपने प्लांट तक अथवा अन्य स्थानों तक ले जा सकेंगी। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) के चेयरमैन और ओएनजीसी के पूर्व सीएमडी दिनेश के सर्राफ ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि पाइपलाइन के इस्तेमाल की दूरी के हिसाब से किराया अदा कर निजी कंपनियां भी राष्ट्रीय गैस ग्रिड के जरिए गैस देश में गैस की ढुलाई कर सकेंगी। राष्ट्रीय गैस ग्रिड का मौजूदा ढांचा करीब 15,000 किलोमीटर का है। सर्राफ ने बताया कि इसके अतिरिक्त लगभग 8,000 किलोमीटर पाइपलाइन का निर्माण कार्य चल रहा है। इस ढांचे में भविष्य में करीब 6,000 किलोमीटर पाइपलाइन और जोड़े जाने का प्रस्ताव है। ग्रिड के निर्माण में देश की विभिन्न गैस पाइपलाइन परियोजनाओं की अहम भूमिका रही है।

वर्तमान में गैस ढुलाई के लिए राष्ट्रीय गैस ग्रिड का इस्तेमाल केवल सरकारी कंपनियां ही कर सकती हैं। लेकिन जिस प्रकार देश में गैस के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है और ग्रीन फ्यूल के तौर पर ऊर्जा उत्पादन में इसकी भूमिका बढ़ रही है, उसे देखते हुए निजी कंपनियों को भी इसका इस्तेमाल करने देने पर विचार हो रहा है।

सर्राफ ने बताया कि निजी कंपनियों को ग्रिड के इस्तेमाल की अनुमति देने का एक लाभ यह होगा कि पाइपलाइन वाले क्षेत्र के विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी। कंपनियां पाइपलाइन के नजदीक गैस आधारित प्लांट लगाने को प्राथमिकता देंगी। इसके अतिरिक्त गैस रेगुलेटर का मानना है कि देश के विभिन्न शहरों में सीएनजी और पीएनजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी इस कदम से लाभ मिलेगा। चूंकि सिटी गैस (पीएनजी) और वाहनों के लिए सीएनजी की बिक्री में निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ रही है, इसलिए उन्हें भी अधिक से अधिक गैस विभिन्न शहरों में ले जाने की आवश्यकता होगी। इस काम में भी गैस ग्रिड की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सरकार रसोईघरों और वाहनों में ईंधन के लिए गैस के उपयोग पर जोर दे रही है।