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75 लाख नए करदाताओं ने दाखिल किया आइटीआर

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली।</strong>&nbsp;चालू वित्त वर्ष में आयकर विभाग से अब तक लगभग 75 लाख नए करदाताओं ने आयकर रिटर्न (आइटीआर) दाखिल किया है। आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कर चोरी रोकने के कई हालिया उपायों के चलते आइटीआर दाखिल करने वालों की संख्या में यह बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर विभाग को चालू वित्त वर्ष के अंत तक तंत्र से 1.25 करोड़ नए करदाता जोड़ने का लक्ष्य दिया हुआ है। अधिकारी ने कहा कि विभाग को यह लक्ष्य तय अवधि में हासिल कर लेने की पूरी उम्मीद है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">आयकर विभाग के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष (2017-18) में 1.06 करोड़ नए करदाताओं ने आइटीआर दाखिल किया था। नया करदाता उसे कहा जाता है जो वर्ष की शुरुआत में टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों में शामिल नहीं था, लेकिन उसने वर्ष की समाप्ति से पहले किसी भी वक्त आइटीआर दाखिल किया। अधिकारी ने कहा कि आइटीआर दाखिल करने वालों को नया करदाता नहीं भी कहा जा सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि आइटीआर के तहत करदाता द्वारा टैक्स में मांगी गई छूट वाजिब हो और उससे आयकर विभाग को किसी भी तरह की टैक्स की प्राप्ति नहीं हुई हो। लेकिन एक बार आयकर डाटाबेस में आ जाने के बाद विभाग की निगाहों से करदाता की आय छुपी नहीं रह सकती है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">सीबीडीटी ने चालू वित्त वर्ष के लिए 1.25 करोड़ नए करदाताओं को लक्षित करने का निर्देश दिया है। इसमें टैक्स विभाग के पश्चिमोत्तर क्षेत्र में अधिकतम 11,48,489 नए करदाता जोड़ने का लक्ष्य है।</span></p> <p>&nbsp;</p>
  Mon, November 5, 2018 Read Full Article

Dhanteras 2018: धनतेरस पर ज्वैलर्स से रहें सावधान, ऐसे खुद समझिए कितना शुद्ध है ...

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली ।</strong>&nbsp;धनतेरस और दिवाली के मौके पर आमतौर पर लोग थोड़ा बहुत सोना खरीदते ही हैं। ऐसे में अगर आप इस बार भी सोने के कुछ आभूषण या शगुन के तौर पर कुछ सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसा भी हो सकता है कि आप बाजार से जो सोना खरीद रहे हैं वो उतना शुद्ध न हो जितना की ज्वैलर्स ने आपको बताया है। ऐसे में आपको घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हम आपको अपनी इस खबर में आपको वो सारी जानकारियां दे रहे हैं जिसकी मदद से आप आसानी से जान सकते हैं कि आपने जो सोना खरीदा है वो कितना शुद्ध है और आपने जो उसकी कीमत चुकाई है वो कितनी जायज है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">आमतौर पर लोग शिकायत करते हैं कि उन्हें उनकी ओर से अदा की गई कीमत के लिहाज से वाजिब शुद्धता वाला सोना नहीं मिला। आपको यह जानकर निश्चित तौर पर हैरानी होगी कि आपके गहने में लिखे अंक ही यह बताने के लिए काफी होते हैं कि आपका सोना कितना शुद्ध है। हम अपनी इस रिपोर्ट के माध्यम से आपको असली सोने की पहचान के बारे में बताने जा रहे हैं।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>जान लें कि 24 कैरेट गोल्ड की नहीं बनती ज्वैलरी:</strong></u>&nbsp;सबसे पहली बात यह कि असली सोना 24 कैरेट का ही होता है, लेकिन इसके आभूषण नहीं बनते, क्योंकि वो बेहद मुलायम होता है। आम तौर पर आभूषणों के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें 91.66 फीसदी सोना होता है। हॉलमार्क पर पांच अंक होते हैं। सभी कैरेट का हॉलमार्क अलग होता। मसलन 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 पर 750 लिखा होता है। इससे शुद्धता में शक नहीं रहता।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>हॉलमार्किंग के नीचे लिखी होती है सोने की शुद्धता:</strong></u>&nbsp;गहनों में हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है। उसी में ज्वैलरी के निर्माण का वर्ष और उत्पादक का लोगो भी बना होता है। ज्वैलरी में एक अंक लिखा होता है जिसके तहत असली सोने की पहचान की जाती है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>आप खुद तय करें क्या है गोल्ड की सही कीमत:</strong></u>&nbsp;बुलियन मार्केट की भाषा में कैरेट गोल्ड का मतलब होता हे 1/24 फीसद गोल्ड। आमतौर पर आभूषण 22 कैरेट के बनते हैं। ऐसे में 22 को 24 से भाग देकर उसे 100 से गुणा करें। यानी (22/24)x100 = 91.66 यानी आपके आभूषण में इस्तेमाल सोने की शुद्धता 91.66 फीसदी होगी। इसी के आधार पर आप अपने सोने का सही रेट तय कर पाएंगे। उदाहरण के तौर पर अगर 24 कैरेट सोने के दाम 32,100 रुपए है तो इसके सही दाम 32,100/24)x22=29,425 रुपए होंगे।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">वहीं अगर आप 18 कैरेट गोल्ड खरीद रहे हैं तो इसकी कीमत 32,100/24)x18=24,075 रुपए होगी। आमतौर पर ज्वैलर्स 18 कैरेट गोल्ड ही आपके सामने पेश करते हैं।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><em><strong>शुद्धता के हिसाब से आभूषणों में ये अंक अंकित होते हैं:</strong></em></span></p> <ul> <li style="text-align: justify;"><span style="font-size:14px">24 कैरेट: 99.9</span></li> <li style="text-align: justify;"><span style="font-size:14px">23 कैरेट: 95.8</span></li> <li style="text-align: justify;"><span style="font-size:14px">22 कैरेट: 91.6</span></li> <li style="text-align: justify;"><span style="font-size:14px">21 कैरेट: 87.5</span></li> <li style="text-align: justify;"><span style="font-size:14px">18 कैरेट: 75.0</span></li> <li style="text-align: justify;"><span style="font-size:14px">17 कैरेट: 70.8</span></li> <li style="text-align: justify;"><span style="font-size:14px">14 कैरेट: 58.5</span></li> <li style="text-align: justify;"><span style="font-size:14px">9 कैरेट: 37.5</span></li> </ul> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">उदाहरण से समझिए कि अगर ज्वैलर ने आपको बताया है कि उसने जो अंगूठी बनाई है वो 22 कैरेट की है, तो उसपर 916 अंक जरूर लिखा होगा। यह अंक मैग्निफाइंग ग्लास से देखा जा सकता है। यह अंक पुष्ट करता है कि आपकी अंगूठी 22 कैरेट की ही है। ऐसे में आप अगर अगली बार सोना खरीदने ज्वैलर्स के पास जाएं तो इन बातों को जरूर ध्यान में रखें। ऐसा करके आप किसी भी तरह की धोखाधड़ी से खुद को बचा सकते हैं।</span></p>
  Mon, November 5, 2018 Read Full Article

शेयर बाजार ने की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 34,990 पर

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली।&nbsp;</strong>भारतीय शेयर बाजार ने आज कमजोर शुरुआत की है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन में सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर सेंसेक्स 21 अंकों की कमजोरी के साथ 34,990 पर और निफ्टी 11.40 अंकों की कमजोरी के साथ 10,541 पर कारोबार करते देखे गए। वहीं निफ्टी 50 में शुमार 50 शेयरों में से 21 हरे निशान पर 28 लाल निशान पर और 1 बिना परिवर्तन के कारोबार करते देखे गए। इसके साथ ही मिडकैप शेयर्स 0.24 फीसद और स्मॉलकैप शेयर्स 0.39 फीसद की तेजी के साथ कारोबार कर रहे हैं।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>रियालिटी सेक्टर में तेजी:</strong></u>&nbsp;वहीं सेक्टोरियल इंडेक्स में भी मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। निफ्टी बैंक में 0.09 फीसद की कमजोरी, निफ्टी ऑटो में 0.03 फीसद की गिरावट, निफ्टी फाइनेंस सर्विस में 0.12 फीसद की गिरावट, निफ्टी एफएमसीजी में 0.12 फीसद की तेजी, निफ्टी आईटी में 0.81 फीसद की तेजी, निफ्टी मेटल में 0.13 फीसद की गिरावट, निफ्टी फॉर्मा में 0.98 फीसद की तेजी और निफ्टी रियालिटी में 1.67 फीसद की तेजी देखने को मिल रही है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>वैश्विक बाजारों का हाल:</strong></u><strong>&nbsp;</strong>आज प्रमुख एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है। सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर जापान का निक्केई -1.16 अंकों की गिरावट के साथ 21985 पर, चीन का शांघाई 0.85 फीसद की गिरावट के साथ 2653 पर, हैंगसेंग 2.22 फीसद की गिरावट के साथ 25875 पर और ताइवान का कॉस्पी 1.56 फीसद की गिरावट के साथ 2063 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। वहीं अगर अमेरिकी बाजारों की बात करें तो बीते दिन तो वो भी गिरावट के साथ बंद हुए हैं। डाओ जोंस 0.43 फीसद की गिरावट के साथ 25270 पर, स्टैंडर्ड एंडपुअर्स 0.63 फीसद की गिरावट के साथ 2723 पर और नैस्डैक 1.04 फीसद की गिरावट के साथ 7356 पर कारोबार कर बंद हुआ।</span></p> <p>&nbsp;</p>
  Mon, November 5, 2018 Read Full Article

शेयर समीक्षा: विदेशी रुझानों, नतीजे और तेल की धार पर होगी बाजार की नजर

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली।</strong>&nbsp;विदेशी बाजारों के रुझानों, आर्थिक आंकड़ों और रुपये व कच्चे तेल की कीमतों से इस सप्ताह घरेलू शेयर बाजार को दिशा मिलेगी। दिवाली और उससे जुड़े अन्य त्योहारों के चलते प्रमुख शेयर बाजार बुधवार और गुरुवार को बंद रहेंगे। बुधवार को बीएसई और एनएसई एक विशेष मुहूर्त सत्र आयोजित करेंगे। दिवाली के अवसर पर मुहूर्त कारोबार शाम पांच बजे से साढ़े छह बजे तक संचालित किया जाएगा।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>वैश्विक बाजारों का हाल:</strong></u>&nbsp;आज प्रमुख एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है। सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर जापान का निक्केई -1.16 अंकों की गिरावट के साथ 21985 पर, चीन का शांघाई 0.85 फीसद की गिरावट के साथ 2653 पर, हैंगसेंग 2.22 फीसद की गिरावट के साथ 25875 पर और ताइवान का कॉस्पी 1.56 फीसद की गिरावट के साथ 2063 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। वहीं अगर अमेरिकी बाजारों की बात करें तो बीते दिन तो वो भी गिरावट के साथ बंद हुए हैं। डाओ जोंस 0.43 फीसद की गिरावट के साथ 25270 पर, स्टैंडर्ड एंडपुअर्स 0.63 फीसद की गिरावट के साथ 2723 पर और नैस्डैक 1.04 फीसद की गिरावट के साथ 7356 पर कारोबार कर बंद हुआ।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>विशेषज्ञों का नजरिया:</strong></u>&nbsp;विशेषज्ञों के मुताबिक सेवा क्षेत्र के पीएमआइ आंकड़ों का इस सप्ताह बाजार पर असर पड़ सकता है। पीएमआइ आंकड़े सोमवार को जारी किए जाएंगे। निवेशकों की निगाह इस सप्ताह अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसलों पर भी टिकी रहेगी।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><em><strong>एपिक रिसर्च के सीईओ मुस्तफा नदीम</strong></em>&nbsp;ने कहा कि विदेशी रुझानों और पश्चिमी बाजारों की कोई भी सकारात्मक खबर या घटनाक्रम घरेलू शेयर बाजार के लिए अहम साबित होगी। कच्चे तेल की कीमत में हाल में आई गिरावट से बाजार का माहौल सकारात्मक बना हुआ है। औद्योगिक उत्पादन और महंगाई पर दूसरे सप्ताह में आने वाले के आंकड़ों पर भी निवेशकों का ध्यान रहेगा। दीवाली की छुट्टी के कारण शेयर बाजार में इस सप्ताह कारोबार का स्तर काफी कम रहेगा।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">गौरतलब है कि रुपये ने शुक्रवार को पांच साल की सबसे बड़ी दैनिक छलांग लगाई थी और यह डॉलर के मुकाबले 100 पैसे मजबूत होकर 72.45 पर बंद हुआ था। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 1,662.34 अंक या पांच फीसद मजबूत होकर 35,011.65 पर बंद हुआ।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>आठ कंपनियों का पूंजीकरण 1.69 लाख करोड़ रुपये बढ़ा:</strong></u>&nbsp;बीएसई सेंसेक्स में सर्वाधिक बाजार पूंजीकरण (एमकैप) वाली 10 कंपनियों में से आठ का एमकैप पिछले सप्ताह कुल 1,69,865.11 करोड़ रुपये बढ़ा। एमकैप में सर्वाधिक बढ़ोतरी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) में दर्ज की गई। टीसीएस का एमकैप 41,351.28 करोड़ रुपये बढ़ा और वह देश की सर्वाधिक एमकैप वाली कंपनी बनी हुई है। एसबीआइ का एमकैप गत सप्ताह 33,333.33 करोड़ रुपये बढ़ा। इस दौरान आइसीआइसीआइ बैंक का एमकैप 25,271.12 करोड़ रुपये और एचडीएफसी का 20,763.9 करोड़ रुपये बढ़ा।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>एफपीआइ ने की दो वर्षो की सबसे बड़ी मासिक निकासी:</strong></u>&nbsp;महंगे कच्चे तेल, रुपये में कमजोरी और चालू खाता घाटा के मोर्चे पर खराब स्थिति के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) ने पूंजी बाजार से अक्टूबर में 38,900 करोड़ रुपये (5.2 अरब डॉलर) निकाल लिए। यह करीब दो साल में किसी भी महीने में हुई सबसे बड़ी निकासी है। इसके साथ ही इस साल अब तक विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी बाजार (शेयर बाजार और पूंजी बाजार) से की गई कुल निकासी एक लाख करोड़ रुपये को पार कर गई। ताजा आंकड़ों के मुताबिक विदेशी एफपीआइ ने अक्टूबर में शेयर बाजार से 28,921 करोड़ रुपये और डेट बाजार से 9,979 करोड़ रुपये निकाले। यह नवंबर 2016 के बाद हुई सबसे बड़ी निकासी है।</span></p> <p>&nbsp;</p>
  Mon, November 5, 2018 Read Full Article

ऑनलाइन शॉपिंग में नकली उत्पादों पर हाई कोर्ट सख्त

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली ।&nbsp;</strong>वेबसाइट के माध्यम से ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली सामान की बिक्री पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्देश देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उनकी वेबसाइट पर जो सामान उपलब्ध हैं, वह नकली नहीं हैं। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि अगर विक्रेता कंपनी विदेश में है और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मालिक नकली उत्पादों की जांच के लिए कोई कदम नहीं उठाता तो फिर ट्रेड मार्क मालिक पर इसकी जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती और उसे कानूनी उपचार पाने से वंचित नहीं रखा जा सकता। महिलाओं के लिए एक लग्जरी फुटवियर ब्रांड की तरफ से दायर याचिका पर पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को उक्त आदेश दिए।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">याचिकाकर्ता कंपनी ने आरोप लगाया है कि भारत की एक ई-कॉमर्स वेबसाइट पर उनके ब्रांड का नकली सामान बेचा जा रहा है। वेबसाइट पर उनके ब्रांड की तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि ग्राहकों को लुभाया जा सके। हाई कोर्ट ने वेबसाइट को नोटिस जारी कर अब तक बिके सामानों की जानकारी देने को कहा है। वेबसाइट को यह आदेश भी दिया गया कि याची की कंपनी के उत्पादों की फोटो व अन्य सामग्री तुरंत वेबसाइट से हटाए। पीठ ने कहा अगर विक्रेता भारत का नहीं है तो फिर उक्त कंपनी के साथ ई-कॉमर्स वेबसाइट मालिक एक अनुबंध करे कि किन शर्तो पर अनुबंध किया जा रहा है।</span></p>
  Mon, November 5, 2018 Read Full Article

सर्विस कंपनियों के अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर की होगी जांच

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली।&nbsp;</strong>राज्यों के बीच वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से हासिल आय का गलत आवंटन रोकने के लिए ऑडिट महानिदेशालय को बैंकों और दूरसंचार कंपनियों जैसे बड़े सेवा प्रदाताओं के अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर की जांच करने के लिए कहा गया है। एक अधिकारी ने कहा कि जीएसटी राजस्व में कमी आने के कारणों का विश्लेषण करने के लिए केंद्र और राज्यों के टैक्स अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इस दौरान कुछ राज्यों ने सेवाओं की अंतर्राज्यीय आपूर्ति के मामले में राजस्व आवंटन से जुड़े मुद्दे उठाए थे।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">कुछ राज्यों ने आशंका जताई है कि सेवा प्रदाता कंपनियां शायद ग्राहकों से वसूले गए कर जीएसटी नियमों और प्लेस ऑफ सप्लाई (पीओएस) नियमों के तहत उस राज्य में जमा नहीं कर रहीं, जहां किए जाने चाहिए। पीओएस नियमों के तहत कर उस जगह जमा होने चाहिए, जहां खपत होती है। लेकिन सेवाओं के मामले में खपत के स्थान की पहचान करना कठिन होता है, इसलिए जीएसटी नियमावली में विस्तार से नियम बनाए गए हैं कि किस परिस्थिति में किस राज्य में कर जमा होने चाहिए। एक अधिकारी ने कहा कि डीजी ऑडिट यह जांच करेगा कि विभिन्न राज्यों में काम करने वाले सेवा प्रदाताओं के अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर उचित राज्य में कर जमा कर रहे हैं या नहीं। ऑडिट महानिदेशालय को तीन-चार महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">नियम यह है कि बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के मामले में सेवा प्राप्त करने वाले का स्थान पीओएस होगा। लेकिन यदि स्थान का पता नहीं चल रहा हो, तो सेवा आपूर्ति करने वाले के स्थान को ही पीओएस माना जाएगा। पोस्ट पेड मोबाइल कनेक्शन के मामले में ग्राहक के बिलिंग का पता पीओएस होगा। मोबाइल, इंटरनेट या होम टेलीविजन के प्री-पेड वाउचर के मामले में आपूर्तिकर्ता के रिकॉर्ड में सेलिंग एजेंट या वितरक के दर्ज पता को पीओएस माना जाएगा। ऑनलाइन रिचार्ज के मामले में दूरसंचार कंपनी के पास ग्राहक के दर्ज पता के आधार पर जीएसटी जमा किया जाएगा। इसी तरह से बीमा, यात्री परिवहन और माल परिवहन (मेल या कुरियर सहित) जैसी अन्य सेवाओं के लिए भी नियम बने हुए हैं।</span></p>
  Mon, November 5, 2018 Read Full Article

डिजिटल पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री के गठन की प्रक्रिया शुरू

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली ।</strong>&nbsp;भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने विलफुल डिफॉल्टर्स समेत सभी कर्जदारों की जानकारी एक जगह संग्रह करने के लिए डिजिटल पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री (पीसीआर) की स्थापना प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके लिए आरबीआइ ने ऐसी कंपनियों से आवेदन (ईओआइ) आमंत्रित किए हैं, जिनका टर्नओवर पिछले तीन साल में 100 करोड़ रुपये से ऊपर रहा हो।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">पीसीआर में विलफुल डिफॉल्टर और लंबित कानूनी मुकदमों की भी सूचनाएं होंगी। इसमें पूंजी बाजार नियामक सेबी, कंपनी मामलों का मंत्रालय, जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन), इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आइबीबीआइ) जैसे संस्थानों के आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे। इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को किसी भी पुराने और नए कर्जदार का का संपूर्ण ब्योरा तुरंत हासिल हो जाएगा। इस साल जून में आरबीआइ ने देश के लिए एक पीसीआर स्थापित करने की घोषणा की थी। पीसीआर की स्थापना से सूचना का अभाव दूर होगा, कर्ज की उपलब्धता को बढ़ावा मिलेगा और कर्ज की संस्कृति मजबूत होगी। इससे पहले कर्ज संबंधी सूचनाओं की उपलब्धता और वर्तमान सूचना संस्थानों की पर्याप्तता की समीक्षा तथा मौजूदा प्रणाली की खामियों की पहचान करने के लिए आरबीआइ ने एक उच्चस्तरीय कार्यदल का गठन किया था। आरबीआइ के ईओआइ दस्तावेज में कहा गया है कि संक्षेप में पीसीआर अलग-अलग जगहों पर मौजूद कर्ज संबंधी सत्यापित सूचनाओं का एक डिजिटल रजिस्ट्री होगा और यह एक वित्तीय सूचना इन्फ्रास्ट्रक्चर के तौर पर काम करेगा। इसे विभिन्न हितधारकों द्वारा देखा जा सकेगा और यह कर्ज संबंधी वर्तमान तंत्र को और समृद्ध करेगा।</span></p> <p>&nbsp;</p>
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इंटरव्यू: ट्रैक्टर साझेदारी से बढ़ेगा खेती-किसानी का आधार

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>सवाल: &rsquo;ग्रामीण क्षेत्रों में उपकरण साझा करने की यह अवधारणा क्या है?</strong></span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>जवाब:&nbsp;</strong>पहले तो मैं आपको यह बता दूं कि उपकरण इसलिए साझा करना पड़ता है क्योंकि किसान वास्तव में ऐसा करना चाहते हैं। हम इस स्थिति को बढ़ाना चाहते हैं। किसानों का एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसके पास ट्रैक्टर या खेती के उपकरणों का अभाव है। वह इन्हें इस्तेमाल तो करना चाहता है लेकिन खरीद नहीं पाता। जबकि जिसके पास यह सुविधा है उसके अपने इस्तेमाल के बाद यह बेकार है। इसलिए इसकी आवश्यकता दोनों तरह के किसानों को है। इसी अवधारणा पर हमने अपनी पहल की शुरुआत की।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>सवाल: &rsquo;इसे संगठित तौर पर कैसे शुरू किया?</strong></span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>जवाब:</strong>&nbsp;इसके लिए हमने जेफार्म सर्विसेज की शुरुआत की। जेफार्म उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, असम, राजस्थान और कई अन्य राज्यों में चल रहा है। किसानों को नामांकित करने के लिए क्षेत्र अधिकारी जिम्मेदार होते हैं। हमारे पास 200 से ज्यादा क्षेत्र अधिकारी हैं जो स्थानीय कृषि अधिकारियों के सहयोग से काम करते हैं।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>सवाल: &rsquo;किसानों के लिए यह किस तरह उपयोगी है?</strong></span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>जवाब:&nbsp;</strong>सबसे बड़ी बात कि यह किसानों के लिए बिल्कुल मुफ्त है। किसान अपनी मर्जी से अपने उपकरण इस पर साझा कर सकते हैं। मसलन आपके पास ट्रैक्टर है और आप 24 घंटे तो इसका उपयोग करते नहीं। लिहाजा खाली वक्त में आप इसे किसी और को किराए पर दे सकते हैं और उस व्यक्ति से कुछ धनराशि ले सकते हैं। जेफार्म यही प्लेटफार्म उपलब्ध कराता है। अधिकांश राज्य सरकारें अपने राज्यों में जेफार्म सर्विसेज लेने के लिए उत्साहित हैं। राज्य सरकारों ने हमसे स्थानीय स्तर पर होने वाली फसलों के आधार पर प्लेटफॉर्म तैयार करने का भी अनुरोध किया है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">उदाहरण के लिए, हम न केवल असम में, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व में काम कर रहे हैं। केरल में हम विशेष रूप से जैविक खेती और बागवानी के लिए बात कर रहे हैं। हम उत्तर प्रदेश में पहले से ही काम कर रहे हैं जो हमारे लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी कंपनी बड़े पैमाने पर अपनी सेवा देगी। हम जेफार्म को टैफे फाउंडेशन के माध्यम से चला रहे हैं। यह कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के लिए बनाया गया फाउंडेशन है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>सवाल: &rsquo;यह एप कैसे काम करता है?</strong></span></p> <p style="text-align:justify">&nbsp;</p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>जवाब:&nbsp;</strong>हमारा एप बहुत ही सरल, लेकिन मॉडर्न है। अगर किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं तो हम कॉल सेंटर के माध्यम से भी किसानों की मदद करते हैं। अब तक हमारे पास 5,000 से ज्यादा डाउनलोड दर्ज हो चुके हैं। यह एप क्षेत्रीय भाषाओं में भी है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>सवाल: &rsquo;इसका लाभ कैसे मिलेगा?</strong></span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>जवाब:</strong>&nbsp;देखिए, भारत में वर्तमान में केवल 45 लाख ट्रैक्टर हैं। इनमें अब तक सिर्फ 45 हजार यानी एक फीसद ट्रैक्टर ही इस प्लेटफॉर्म से जुड़ सके हैं। यदि इनमें से 10 फीसद ट्रैक्टर भी साझा किए जा सके तो इसका दायरा काफी बढ़ जाएगा। यह छोटे किसानों को अपनी कमाई बढ़ाने की सुविधा उपलब्ध करा सकता है। किसान अपनी कमाई को बढ़ाने के लिए नए तरीकों को सीखने में बहुत उत्सुक रहते हैं और इनमें रुचि रखते हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश, जहां हमने पहले शुरुआत की थी, अच्छा काम कर रहे हैं। ये सभी राज्य काम के आकार को 10-15 गुना तक विस्तार दे सकते हैं। अभी तक हम उत्तर प्रदेश के सिर्फ 18 जिलों और राजस्थान के 2 जिलों में काम कर रहे हैं। खेती-किसानी में ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों की भूमिका भी काफी अहम है। सभी किसानों के पास इनका होना संभव नहीं है। इसे देखते हुए ट्रैक्टर निर्माता कंपनी टैफे ने एक अनूठी पहल की है। कंपनी किसानों के बीच ट्रैक्टर साझेदारी को बढ़ावा दे रही है। टैफे के प्रेसिडेंट व सीईओ टीआर केसवन ने कहा कि इसके लिए एक एप भी बनाया है।</span></p>
  Sun, November 4, 2018 Read Full Article

सरकारी बैंकों के लिए फिर खुला खजाना, जल्द मिलेगी मदद

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली ।</strong>&nbsp;वित्तीय क्षेत्र में फंड की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार एक बार फिर बैंकों के लिए अपना खजाना खोलने जा रही है। इस बार सरकारी बैंकों को 20,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद दिए जाने का प्रस्ताव है जिस पर जल्द फैसला होगा। सरकार इसी वर्ष जनवरी में कई सरकारी बैंकों को 8,136 करोड़ रुपये और उसके बाद जुलाई में पांच सरकारी बैंकों को 11,336 करोड़ रुपये की राशि दे चुकी है। इस बार उन बैंकों को राशि उपलब्ध कराई जा रही है जो सीधे तौर पर गैर बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) को ज्यादा फंड उपलब्ध कराते हैं। सरकार का यह कदम रियल एस्टेट, ऑटो उद्योग को ज्यादा कर्ज दिलाने में मददगार साबित होगा।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">एनबीएफसी ही नहीं, बल्कि दूसरे वित्तीय क्षेत्र में भी अभी वित्त की समस्या बनी हुई है। इस बात को लेकर रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच तनाव भी है। पिछले दिनों उद्योग जगत की तरफ से सरकार और आरबीआइ को स्पष्ट संदेश भी भेजा गया कि वह बैंकिंग व्यवस्था में और ज्यादा पूंजी उपलब्धता का इंतजाम करे। इसके बाद ही सरकार के भीतर मामले की गंभीरता को समझा गया है। पिछले शुक्रवार को देश के कुछ प्रमुख बैंकों के साथ वित्त मंत्री अरुण जेटली की इस बारे में चर्चा भी हुई है। फिलहाल 20,000 करोड़ रुपये की मदद देने की घोषणा की जा सकती है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">सरकारी खजाने को एक बार फिर खोलने की नौबत इसलिए भी आ गई है कि सार्वजनिक क्षेत्र के ज्यादातर बैंक अभी अपने स्तर पर अतिरिक्त फंड का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। अक्टूबर, 2017 में केंद्रीय कैबिनेट ने इन बैंकों के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया गया था। उसमें से 1.35 लाख करोड़ रुपये की राशि बांड्स व वित्तीय मदद के जरिये दी जानी थी। जुलाई, 2018 तक कुछ सरकारी बैंकों ने 71 हजार करोड़ रुपये के बांड्स जारी किये थे। लेकिन अभी 11 बैंकों पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने प्रांम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) लगाया हुआ है। पीसीए के तहत बैंक किसी भी ग्राहक को बड़ी मात्र में कर्ज नहीं दे सकते। इसके साथ ही उनकी शाखा विस्तार जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लग जाता है। इस वजह से इन बैंकों की बाजार से राशि जुटाने की क्षमता भी प्रभावित हो गई है। लिहाजा उनके समक्ष सरकार से निवेश के रूप में पूंजी लेने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा है। सूत्रों का कहना है कि पीसीए से बाहर रहने वाले पीएनबी जैसे कुछ बैंकों को भी सरकार से बड़ी रकम मिल सकती है।</span></p>
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उपभोक्ता देशों के हितों की अनदेखी संभव नहीं

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली।&nbsp;</strong>केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने कहा है कि आठ देशों को ईरान से कच्चा तेल खरीदने की अमेरिकी मंजूरी से सिद्ध हो गया है कि खपत करने वाले देशों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री निरंतर इस बात को कहते रहे हैं कि खपत करने वाले देशों के हित सर्वोपरि हैं। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध पांच नवंबर से लागू हो रहा है। अमेरिका अगले सप्ताह सोमवार को उन आठ देशों की सूची जारी करेगा, जिन्हें प्रतिबंध लागू होने के छह महीनों तक ईरान से तेल आपूर्ति की छूट मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक इनमें भारत का नाम शामिल है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">प्रधान ने कहा कि अमेरिका से मिली इस मंजूरी का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। उनके इस अभियान से न केवल भारत को कच्चे तेल की सप्लाई सुनिश्चित हुई, बल्कि कई अन्य देशों को भी इसका लाभ हुआ है। ईरान से तेल लाने का ब्यौरा पूछे जाने पर प्रधान ने कहा यह जल्द तय हो जाएगा।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">आइटी मंत्रालय के सीएससी और तीन पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों के बीच शनिवार को कॉमन सर्विस सेंटर के जरिेये एलपीजी सिलेंडर के वितरण को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद और पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी उपस्थित थे।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>उज्ज्वला योजना के 80 फीसद लाभार्थियों ने कराया रीफिल:</strong></u>&nbsp;पेट्रोलियम मंत्री ने उन आरोपों को निराधार करार दिया जिसमें कहा गया है कि उज्ज्वला योजना में पहला सिलेंडर लेने के बाद कोई दूसरा सिलेंडर नहीं लेता है या उसे रीफिल नहीं कराता। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत पौने छह करोड़ कनेक्शन दिए गए हैं और इसमें से 80 फीसद तक रीफिल हो रहा है। यही नहीं, इसमें साल में न्यूनतम चार सिलेंडर तक रीफिल हो रहे हैं। कॉमन सर्विस सेंटर के जरिये एलपीजी सिलेंडरों के वितरण के संबंध में सीएससी और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के बीच हुए एमओयू के मौके पर उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी ग्राहकों को लेकर सरकार संजीदा है। पिछले दिनों की तुलना में सब्सिडी बढ़ी है। यह करीब 55 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि अब एलपीजी सिलेंडरों के वितरण से सीएससी के ग्रामीण उद्यमी भी मुनाफा अर्जित कर पाएंगे।</span></p>
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निजी क्षेत्र की कंपनियां भी कर सकेंगी सरकारी गैस ग्रिड का उपयोग

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली ।</strong>&nbsp;देश में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सरकार इसके उपयोग का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके तहत गैस के परिवहन को सुगम बनाने की दृष्टि से राष्ट्रीय गैस ग्रिड को निजी क्षेत्र के लिए खोलने पर विचार किया जा रहा है। इस आशय का एक प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">गैस ग्रिड को निजी क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए खोलने का अर्थ होगा कि निजी कंपनियां भी अपनी आवश्यकता के मुताबिक गैस को पोर्ट से अपने प्लांट तक अथवा अन्य स्थानों तक ले जा सकेंगी। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) के चेयरमैन और ओएनजीसी के पूर्व सीएमडी दिनेश के सर्राफ ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि पाइपलाइन के इस्तेमाल की दूरी के हिसाब से किराया अदा कर निजी कंपनियां भी राष्ट्रीय गैस ग्रिड के जरिए गैस देश में गैस की ढुलाई कर सकेंगी। राष्ट्रीय गैस ग्रिड का मौजूदा ढांचा करीब 15,000 किलोमीटर का है। सर्राफ ने बताया कि इसके अतिरिक्त लगभग 8,000 किलोमीटर पाइपलाइन का निर्माण कार्य चल रहा है। इस ढांचे में भविष्य में करीब 6,000 किलोमीटर पाइपलाइन और जोड़े जाने का प्रस्ताव है। ग्रिड के निर्माण में देश की विभिन्न गैस पाइपलाइन परियोजनाओं की अहम भूमिका रही है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">वर्तमान में गैस ढुलाई के लिए राष्ट्रीय गैस ग्रिड का इस्तेमाल केवल सरकारी कंपनियां ही कर सकती हैं। लेकिन जिस प्रकार देश में गैस के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है और ग्रीन फ्यूल के तौर पर ऊर्जा उत्पादन में इसकी भूमिका बढ़ रही है, उसे देखते हुए निजी कंपनियों को भी इसका इस्तेमाल करने देने पर विचार हो रहा है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">सर्राफ ने बताया कि निजी कंपनियों को ग्रिड के इस्तेमाल की अनुमति देने का एक लाभ यह होगा कि पाइपलाइन वाले क्षेत्र के विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी। कंपनियां पाइपलाइन के नजदीक गैस आधारित प्लांट लगाने को प्राथमिकता देंगी। इसके अतिरिक्त गैस रेगुलेटर का मानना है कि देश के विभिन्न शहरों में सीएनजी और पीएनजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी इस कदम से लाभ मिलेगा। चूंकि सिटी गैस (पीएनजी) और वाहनों के लिए सीएनजी की बिक्री में निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ रही है, इसलिए उन्हें भी अधिक से अधिक गैस विभिन्न शहरों में ले जाने की आवश्यकता होगी। इस काम में भी गैस ग्रिड की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सरकार रसोईघरों और वाहनों में ईंधन के लिए गैस के उपयोग पर जोर दे रही है।</span></p>
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ओएनजीसी का लाभ 61 फीसद बढ़कर 8,265 करोड़ रुपये हुआ

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली।</strong>&nbsp;सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर, 2018) में 61 फीसद बढ़कर 8,265 करोड़ रुपये रहा है। कंपनी ने कहा कि तेल के ऊंचे दाम से हुए फायदे ने उत्पादन में कमी से हुए नुकसान की भरपाई कर दी। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ 5,131 करोड़ रुपये रहा था।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">एक बयान में कंपनी ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये के भाव में गिरावट से कंपनी को प्रति बैरल 5,117 रुपये की आय हुई जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 61 फीसद ज्यादा है। ओएनजीसी को समीक्षाधीन तिमाही में प्राकृतिक गैस के एवज में प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) 3.5 डॉलर मिले। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इस मद में कंपनी को 2.48 डॉलर मिले थे। कंपनी ने कहा कि समीक्षाधीन अवधि में उसका राजस्व 47.6 फीसद बढ़कर 27,989 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान कंपनी का तेल उत्पादन सात फीसद गिरकर 49 लाख टन रहा। हालांकि समीक्षाधीन अवधि में गैस उत्पादन तीन फीसद बढ़कर 6.1 अरब घनमीटर पर पहुंच गया।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">कंपनी ने बताया कि एक ठेकेदार द्वारा वेस्टर्न ऑफशोर क्षेत्र में उत्पादन यूनिट समय पर तैयार नहीं करने की वजह से उत्पादन में कमी आई। हालांकि कंपनी ने कहा कि इसी वजह से ठेका रद कर संयंत्र स्थापना का काम नए ठेकेदार को सौंपा गया है। कंपनी ने यह भी कहा कि वेस्टर्न ऑफशोर में दमन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद गैस उत्पादन में इजाफा होने की उम्मीद है।</span></p> <p>&nbsp;</p>
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देश के 15 नए शहरों में जल्द दौड़ेगी मेट्रो, अलग-अलग चरणों में काम जारी

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली ।</strong>&nbsp;दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरू जैसे शहरों में जहां पहले से मेट्रो दौड़ रही है वहीं 15 दूसरे शहरों में मेट्रो चलाने की तैयारी चल रही है। आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इन 15 शहरों में 664 किमी लंबे मेट्रो रेल प्रोजक्ट पर अलग-अलग चरणों में काम चल रहा है। वहीं 515 किमी से ज्यादा लंबे रूट पर पहले से मेट्रो चल रही है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">अभी इंदौर, भोपाल, कानपुर, आगरा, मेरठ, पुणे, नागपुर, अहमदाबाद, विजयवाड़ा, कोझीकोड, कोयंबटूर, पटना, गुवाहाटी, वाराणसी और विशाखापट्टनम जैसे शहरों में मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इन प्रोजेक्ट की स्थिति पर बात करते हुए पुरी ने कहा कि कई नए शहरों में मेट्रो रेल सिस्टम की जरूरत महसूस की जा रही है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मेट्रो रेल पॉलिसी 2017 के तहत डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी गई है। दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-पानीपत, दिल्ली-अलवर के बीच रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के लिए 373 किमी के प्रोजेक्ट पर योजना बनाई जा रही है। पुरी ने कहा कि नए मेट्रो प्रोजेक्ट के अप्रूवल के लिए लास्ट मील कनेक्टिविटी होना जरूरी है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने विभिन्न मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए 2015-16 में 9,286.09 करोड़ रुपये, 2016-17 में 15,298.61 करोड़ रुपये, 2017-18 में 13,956.23 करोड़ रुपये और 2018-19 (30 सितंबर 2018 तक) में 7,481.28 करोड़ रुपये का फंड जारी किया है। नियमों के मुताबिक, केंद्र सरकार राज्यों के मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए कुल लागत का 10 फीसद ग्रांट या राज्य सरकारों के साथ 50ः50 इक्विटी शेयर करती है। वहीं पीपीपी मॉडल के तहत बनने वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए 20 फीसद तक की कैपिटल कॉस्ट का वहन करती है।</span></p> <p>&nbsp;</p>
  Sat, November 3, 2018 Read Full Article

छोटे कारोबारियों को 59 मिनट में मिल जाएगा 1 करोड़ तक का लोन, पीएम मोदी ने लॉन्च ...

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली ।</strong>&nbsp;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को छोटे एवं मझोले उद्यमों को आगे बढ़ाने के MSME लोन सुविधा लॉन्च की। इसके तहत, महज 59 मिनट में एक करोड़ रुपए तक के लोन को मजूरी मिल जाएगी। इसके अलावा लोन पर छोटे कारोबारियों को 2 फीसद की छूट मिलेगी।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">&nbsp;दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री मोदी ने सपॉर्ट ऐंड आउटरीच इनिशटिव के लॉन्च इंवेट में 59-मिनट लोन पोर्टल की लॉन्चिंग का ऐलान करते हुए कहा कि उद्योग शुरू करने में सबसे बड़ी समस्&zwj;या लोन लेना है। इसी वजह से हमने लोन पोर्टल शुरू किया है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत जल्द ही ईज ऑफ डुईंग बिजनेस में शीर्ष-50 में शामिल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चार साल पहले जब हम सत्ता में नहीं थे तब हमारी रैंकिंग 142 थी। आज हम 77वें पायदान पर हैं।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कर्ज पर ब्याज सहायता को तीन फीसद से बढ़ाकर पांच फीसद करने की भी घोषणा की। इसे अलावा जीएसटी के तहत पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों को एक करोड़ रूपये तक के नए कर्ज पर ब्याज दर में 2 फीसद की छूट दी जाएगी। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने MSME सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 12 नीतियों को तैयार किया है</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">जानकारी के मुताबिक, देश में 6.3 करोड़ से ज्यादा MSME यूनिट कार्य कर रही हैं जिनमें 11.1 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। आउटरीच प्रोग्राम 100 दिनों तक चलेगा और इसके तहत देशभर के 100 जिलों को कवर किया जाएगा।&nbsp;</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>लोन के लिए कैसे करें अप्लाई?</strong><br /> लोन के लिए psbloansin59minutes.com पर जाकर अप्लाई करें। यहां आवेदनकर्ता का नाम, ईमेल आईडी, फोन नंबर भरकर OTP जनरेट कर रजिस्टर करना होगा। इसके बाद लोन के लिए आगे की प्रक्रिया करनी होगी।</span></p> <p>&nbsp;</p>
  Sat, November 3, 2018 Read Full Article

धनतेरस से पहले सस्ता हुआ सोना, जानिए क्या रहे आज के दाम

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली ।</strong>&nbsp;शुक्रवार को सर्राफा बाजार में सोने के भाव में कमी देखी गई। तीन दिन बाद शुक्रवार को सोना 150 रुपये गिरकर 32,630 रुपये प्रति दस ग्राम पर आ गया। हालांकि, चांदी में मजबूती रही और यह 310 रुपये उछलकर 39,500 रुपये प्रति किलो हो गुई।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक, वैश्विक बाजार में नरमी और ज्वैलरी खरीददारी कमजोर होने से तीन दिन बाद सोने की कीमतों में असर देखने को मिला। इसके अलावा, खरीददार धनतेरस के मद्देनजर खरीददारी टाल रहे हैं।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 99.9 और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 150-150 रुपये गिरकर क्रमश: 32,630 और 32,480 रुपये प्रति दस ग्राम हो गया। जबकि सोने की आठ ग्रामी गिन्नी 24,900 रुपये प्रति पर स्थिर रही। वहीं वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सिंगापुर में सोना 0.03 फीसद गिरकर 1,233.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, चांदी भी 0.03 फीसद फिसलकर 14.82 डॉलर प्रति औंस हो गई।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">दूसरी ओर, चांदी हाजिर 310 रुपए बढ़कर 39,500 रुपए प्रति किलोग्राम और साप्ताहिक ​वाली चांदी 418 रुपये बढ़कर 38,546 रुपये प्रति किलो पर आ गई। चांदी सिक्कों में लिवाली के भाव 76,000 और बिकवाली भाव 77,000 रुपये प्रति सैकड़ा रहे।</span></p> <p>&nbsp;</p>
  Sat, November 3, 2018 Read Full Article

सेंसेक्स निकला 35,000 के पार, निफ्टी 10,553 पर हुआ बंद

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली ।&nbsp;</strong>हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिवस में शेयर बाजार ने शानदार कारोबार किया। आज पूरे दिन शेयर बाजार में तेजी जारी रही। दिन का कारोबार खत्म होने तक सेंसेक्स 579 अंकों की तेजी के साथ 35,011 अंक पर और निफ्टी 172 अंकों की तेजी के साथ 10,553 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में शुमार 50 शेयरों में से 37 हरे निशान पर और 13 लाल निशान पर कारोबार कर बंद हुए। वहीं अगर मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स की बात करें तो मिडकैप 0.48 फीसद और स्मॉलकैप 1.31 फीसद की बढ़त के साथ बंद हुए।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>दिन के 10 बजकर 43 मिनट&nbsp;</strong>पर सेंसेक्स 575 अंकों की तेजी के साथ 35,007 पर और निफ्टी 181 अंकों की बढ़त के साथ 10,561 पर कारोबार करते देखे गए। वहीं निफ्टी 50 में शुमार 50 शेयरों में से 46 हरे और 4 लाल निशान पर कारोबार करते देखे गए।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>सुबह 10 बजे</strong>&nbsp;सेंसेक्स 453 अंकों की तेजी के साथ 34,885 पर और निफ्टी 145 अंकों की तेजी के साथ 10,525 पर कारोबार करता देखा गया। वहीं निफ्टी 50 में शुमार 50 शेयरों में से 48 हरे निशान पर और 2 लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong><u>ओपनिंग:</u></strong>&nbsp;सुबह 9 बजकर 17 मिनट पर सेंसेक्स 258 अंकों की तेजी के साथ 34,690 पर और निफ्टी 81 अंकों की तेजी के साथ 10,462 पर कारोबार करता देखा गया। निफ्टी 50 में शुमार 50 शेयरों में से 45 तेजी तेजी के साथ 4 गिरावट के साथ और एक बिना परिवर्तन के कारोबार करते देखे गए। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिल रही है। मिडकैप शेयरों में 1.19 फीसद और स्मॉलकैप शेयरों में 1.35 फीसद की तेजी देखने को मिल रही है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">गौरतलब है कि गुरुवार के कारोबार में सेंसेक्स 10 अंकों की गिरावट के साथ 34,431 पर और निफ्टी 6 अंकों की गिरावट के साथ 10,379 पर बंद हुआ था।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><u><strong>वैश्विक बाजार का हाल:</strong></u>&nbsp;दिन के 9 बजे एशियाई बाजार में तेजी देखने को मिल रही है। जापान का निक्केई 1.23 फीसद की बढ़त के साथ 21954 पर, चीन का शांघाई 1.09 फीसद की बढ़त के साथ 2634 पर, हैंगसेंग 2.29 फीसद की तेजी के साथ 26014 पर और ताइवान का कॉस्पी 2.13 फीसद की तेजी के साथ 2067 पर कारोबार कर रहा है। वहीं अमेरिकी बाजार की बात करें तो वो भी बीते दिन बढ़त के साथ बंद हुए। बीते दिन डाओ जोंस 1.06 फीसद की तेजी के साथ 25380 पर, स्टैंडर्ड एंड पुअर्स 1.06 फीसद की तेजी के साथ 2740 पर और नैस्डेक 1.75 फीसद की तेजी के साथ 7434 पर बंद हुआ।</span></p> <p>&nbsp;</p>
  Sat, November 3, 2018 Read Full Article

कामकाजी महिलाओं की संख्या बढ़ाकर देश कर सकता है विकास: अमिताभ कांत

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली।</strong>&nbsp;नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा है कि अगर देश में कामकाजी महिलाओं की संख्या 24 फीसद से बढ़कर 48 फीसद हो जाए तो देश की अर्थव्यवस्था में 700 बिलियन अमेरिकी डालर जुड़ सकता है। एक कार्यक्रम में भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए, महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">मिली जानकारी के मुताबिक, देश में केवल 24 फीसद महिलाएं कामकाजी हैं, जबकि दुनिया भर में यह आंकड़ा 48 फीसद है। कांत ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पुरुषों को महिलाओं के रोजगार में सहयोग करना चाहिए। अमिताभ कांत ने कहा कि अगर लैंगिक समानता में ध्यान दिया जाए तो देश 9 फीसद से 10 फीसद की दर से आगे बढ़ सकता है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए नौकरियों के अवसर बहाल करने चाहिए, इसके साथ देश के पूर्वी हिस्से और ग्रामीण इलाकों में उनकी शिक्षा और पोषण पर भी ध्यान देने की जरूरत है। नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि चीन में विश्व स्तरीय आधारभूत संरचना का निर्माण भारत के लिए एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि सरकार को सड़कों और हवाई अड्डों पर ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं शुरू की जानी चाहिए और इसका संचालन और रखरखाव निजी क्षेत्र के हाथों में देना चाहिए।</span></p>
  Sat, November 3, 2018 Read Full Article

ई-शॉपिंग के मामले में मेट्रो सिटीज को पछाड़ आगे निकले छोटे शहर

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली।</strong>&nbsp;मेट्रो शहरों से निकलकर ई-कॉमर्स कंपनियों की पहुंच छोटे और मझोले शहरों में मजबूत हो रही है। इस त्योहारी सीजन में ई-कॉमर्स कंपनियों के अब तक के बिक्री आंकड़े बता रहे हैं कि दो तिहाई बिक्री गैर मेट्रो शहरों में हुई है। ई-कॉमर्स के जरिये बिक्री पर हुए अध्ययनों से यह तथ्य सामने आया है कि देश में ऑनलाइन बिक्री में वृद्धि की मुख्य वजह त्योहारों हैं।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">इस वर्ष भी अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नैपडील से लेकर पेटीएम मॉल समेत तमाम ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर त्योहारी बिक्री के विशेष आयोजन किए गए हैं। अब तक हुई त्योहारी बिक्री के आधार पर स्नैपडील का मानना है कि उसके 75 प्रतिशत से अधिक ऑर्डर गैर मेट्रो शहरों से आ रहे हैं जो पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">रिसर्च फर्म रेडसीयर कंसल्टिंग के अनुसार पिछले पांच साल में भारत में ई-कॉमर्स बाजार के विकास का श्रेय त्योहारों पर होने वाली बिक्री को ही जाता है। इनकी कुल बिक्री में त्योहारी बिक्री की अनुपात छह गुना हो गया। यह अनुपात 0.7 फीसद से बढ़कर 3.2 फीसद हो गया है। एक अन्य रिसर्च फर्म फारेस्टर की हालिया रिपोर्ट कहती है कि टियर-2 बाजारों में यह वृद्धि 600 फीसद से ज्यादा रही है। इस वृद्धि में मोबाइल फोन ने अहम भूमिका निभायी है। रिपोर्ट के मुताबिक टियर-3 शहरों में आधे ऑनलाइन ग्राहक अपने फोन से ही शॉपिंग कर रहे हैं। जबकि टियर-1 शहरों में सिर्फ एक तिहाई ग्राहक ही ऑनलाइन खरीदारी के लिए फोन का इस्तेमाल करते हैं।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">स्नैपडील के प्रवक्ता का कहना है कि ऑनलाइन शॉपिंग में भी अलग-अलग वेबसाइट पर अलग तरह के ग्राहक जा रहे हैं। मसलन स्नैपडील के प्लेटफार्म का इस्तेमाल ग्राहक ऐसे उत्पादों की खरीद के लिए कर रहे हैं जो उनके व्यक्तिगत उपयोग की हैं। जबकि अधिकांश ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर बड़े इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और मोबाइल फोन की खरीदारी हो रही है।&nbsp;</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">बाजार के जानकारों का मानना है कि नॉन मेट्रो शहरों के ग्राहकों को ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर उपलब्ध बड़े ब्रांड, डेबिट व क्रेडिट कार्ड पर ईएमआइ की सुविधा और व्यक्तिगत ऑफर व आसान फाइनेंस स्कीमों ने आकर्षित करने में अहम भूमिका निभायी है।</span></p>
  Fri, November 2, 2018 Read Full Article

आरबीआइ व सरकार के विवाद में फंसा उद्योग जगत, कर्ज दिलाने की मांग

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली ।</strong>&nbsp;आरबीआइ और वित्त मंत्रालय के बीच विवाद में उद्योग जगत की परेशानी और बढ़ रही है। उद्योग का मानना है कि दोनों को आपसी विवाद भूलकर अर्थव्यवस्था के समक्ष फंड की किल्लत दूर करने के उपायों पर ध्यान देना चाहिए। देश के दो शीर्ष उद्योग चैंबर फिक्की और सीआइआइ ने अलग अलग बयान जारी कर कहा है कि सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच बढ़ते तनाव से उनके हितों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">गुरुवार को सीआइआइ के तत्वाधान में विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की एक बैठक हुई जिसमें नकदी के गंभीर होते संकट पर चिंता जताई गई और आरबीआइ से तत्काल उचित कदम उठाने को कहा गया है। उद्योग जगत की राय है कि अभी फोकस ज्यादा कर्ज वितरण पर होना चाहिए। बैठक में 260 उद्योग संघों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इन समूहों में बिजली का सामान, पंखे, पंप्स व अन्य घरेलू उपकरण बनाने समेत एसएमई सेक्टर की कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे। इनके मुताबिक ज्यादातर छोटे व मझोले उद्योग 80 फीसद क्षमता पर काम कर रहे हैं और इन्हें विस्तार के लिए तत्काल फंड की जरूरत है। लेकिन बैंकों की तरफ से इन्हें पर्याप्त लोन नहीं मिल पा रहा है। जबकि दूसरे स्नोतों से मिलने वाले कर्ज पर ब्याज की दर काफी अधिक है। नए नियमों की वजह से गैर बैंकिंग कंपनियों (एनबीएफसी) से भी पहले की तरफ कर्ज नहीं मिल रहा है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">दूसरी तरफ फिक्की अध्यक्ष राशेष शाह का कहना है कि बैंक कर्ज की स्थिति सुधारने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक की तरफ से कोशिश तो की गई है लेकिन अभी और कदम उठाने की जरूरत है। मौजूदा आर्थिक रिकवरी और आठ फीसद की विकास दर पाने के लिए और अधिक फंड की आवश्यकता है। खासतौर पर एनबीएफसी के समक्ष उत्पन्न फंड की दिक्कत दूर करने के लिए फिक्की ने 21 सूत्रीय सुझाव दिए हैं जिन्हें तत्काल लागू करने की जरूरत है। फिक्की ने भी कहा है कि छोटे व मझोले उद्योगों से जुड़े उसके सदस्य फंड की दिक्कत की शिकायत कर रहे हैं। त्योहारी सीजन में फंड की समस्या तमाम तरह के उद्योगों पर असर डाल रही हैं।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">सीआइआइ अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल का कहना है कि वित्तीय क्षेत्र के समक्ष कई तरह की दिक्कतों को देखते हुए तत्काल और दीर्घकालिक उपायों पर सहमति बनाने की जरूरत है। सीआइआइ ने एक तरह से चेतावनी देते हुए कहा है कि जिस तरह के वित्तीय क्षेत्र के सभी अंग एक दूसरे से जुड़े हैं उसमें एक क्षेत्र की समस्या तत्काल दूसरे को भी प्रभावित करती है। इसलिए सभी संबंधित पक्षों को एक दूसरे के साथ संवाद स्थापित कर समस्या का समाधान निकालना चाहिए। सरकार और आरबीआइ के बीच मौजूदा विवाद के पीछे कर्ज की दिक्कत भी है। आरबीआइ ने 11 सरकारी बैंकों पर खुलकर कर्ज देने समेत कई तरह की पाबंदिया लगाई हुई हैं। सरकार इन्हें हटाने की मांग कर रही है।</span></p>
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जीएसटी कलेक्शन का आंकड़ा दूसरी बार एक लाख करोड़ रुपये के पार

<p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>नई दिल्ली</strong>। अक्टूबर महीने के वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) का आंकड़ा आ गया है। बीते महीने जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ से ज्यादा रहा है। गुरुवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट कर बताया कि अक्टूबर महीन में जीएसटी संग्रह लोअर टैक्स रेट, कम चोरी की वजह से 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। सितंबर में यह कलेक्शन 94,442 करोड़ रुपए था।&nbsp;</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">जेटली ने ट्वीट के जरिए बताया, &#39;अक्टूबर महीने (2018) में जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ के आंकड़े को पार गया है। जीएसटी के इस सफलता के पीछे देशभर में एक टैक्स की व्यवस्था और दूसरे टैक्स सुधार और टैक्स अधिकारीयों का शून्य हस्तक्षेप है। इससे पहले अप्रैल में जीएसटी संग्रह का आंकड़ा एक लाख के पार गया था।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px">वित्त मंत्रालय के मुताबिक, अक्टूबर 2018 के दौरान कुल जीएसटी रेवेन्यू कलेक्शन 100,710 करोड़ रुपए रहा है, जिसमें सीजीएसटी 16,464 करोड़ रुपए, एसजीएसटी 22,826 करोड़ रुपए, आईजीएसटी 53,419 करोड़ रुपए, सेस 8,000 करोड़ रुपए शामिल है।</span></p> <p style="text-align:justify"><span style="font-size:14px"><strong>अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन</strong><br /> अप्रैल में 1.03 लाख करोड़ रुपए का जीएसटी संग्रहण रहा। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान कुल जीएसटी कलेक्शन 7.41 लाख करोड़ रुपए रहा था। गौरतलब है कि वस्तु एवं सेवा कर को बीते साल 1 जुलाई को देशभर में लागू कर दिया गया था।&nbsp; अप्रैल 2018 के दौरान कुल जीएसटी रेवेन्यू कलेक्शन जो कि 1,03,458 करोड़ रुपए रहा था उसमें सीजीएसटी 18,652 करोड़ रुपए, एसजीएसटी 25,704 करोड़ रुपए, आईजीएसटी 50,548 करोड़ रुपए (आयात से एकत्रित 21,246 करोड़ रुपए) और सेस के जरिए 8,554 करोड़ रुपए (आयात से मिले 702 करोड़ रुपए) रहा।</span></p>
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